गोरखपुर त्रासदी में मसीहा बने डॉ. कफील अहमद

Gorakhpur Hospital Tragedy

गोरखपुर। गोरखपुर त्रासदी से प्रदेश ही नहीं ब्लकि पूरा देश हिल गया है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही 63 मासूमों की जिन्दगी लील गई। इस घटना के बाद हर ओर दुख और गम का ही माहौल है, लेकिन इस घटना में कुछ ऐसा भी देखने को मिला कि इंसानियत पर विश्वास दोबारा जाग गया है। दरअसल बीआरडी हॉस्पिटल के डॉ. कफील अहमद कई लोगों के लिए मसीहा बनकर उभरे जिससे कई जिन्दगियां बच गई, वरना नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।

डॉ. कफील अहमद बने मसीहा

बता दें कि डॉ. कफील अहमद एक बाल रोग विशेषज्ञ और इंसेफेलाइटिस विभाग के प्रभारी हैं। दरअसल जैसे ही डॉ. कफील अहमद को पता चला कि ऑक्सीजन खत्म होने वाली है तो पूरे स्टाफ सहित वह भी घबरा गए। लेकिन उसके बाद उन्होंने विवेक से काम लेते हुए खुद को संभाला और तुरंत अपने परिचित डॉक्टरों के पास रवाना हो गए।

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बता दें कि डॉ. कफील ने रात 3 बजे के करीब अपने परिचित डॉक्टर के पास से 3 जंबो सिलेंडरों का इंतजाम किया। जिससे सुबह तक स्थिति किसी तरह संभल सकी। इस दौरान सुबह 7 बजे के करीब एक बार फिर से ऑक्सीजन खत्म होने लगी तो डॉ. कफील फिर से ऑक्सीजन सिलेंडरों का इंतजाम करने निकल पड़े और एक दर्जन ऑक्सीजन सिलेंडरों का इंतजाम किया।

Gorakhpur Hospital Tragedy

खास बात यह है कि डॉ. कफील ने ऑक्सीजन के लिए इतनी परेशानी तो उठायी है, साथ ही अपने पैसों से ऑक्सीजन सिलेंडरों का इंतजाम किया। जिससे कई जानें बचायी जा सकी। वरना मरने वाले बच्चों की संख्या में और भी ज्यादा का इजाफा हो सकता था।

डॉ. कफील अहमद के इस प्रयास से एक बार फिर से डॉक्टरी पेशे के प्रति इज्जत बढ़ गई है। यकीनन देश को डॉ. कफील अहमद जैसे जिम्मेदार और संवेदनशील डॉक्टरों की बेहद जरुरत है।

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