बालार्क सूर्य मंदिर जानें क्यों है ख़ास…

Balark Sun Temple

मऊ जिले में स्थित बालार्क सूर्य मन्दिर देश के चार बड़े सूर्य मंदिरों में से एक है। जहाँ भगवान सूर्य की बाल रुप की पुजा की जाती है। कहा जाता है कि इस सूर्य मन्दिर की आधारशिला भगवान राम ने अपने हाथो से रखी थी। जिले के मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र के देवलास गांव में स्थिति सूर्य मन्दिर ब्रम्हा के पाँच पुत्रो में से एक देवल श्रृषि की तपोभूमि भी रही है। इस पौराणिक सूर्य मन्दिर का ऐतिहासिक महत्व है। कहा जाता है कि यह स्थान देवल श्रृषि की तपोभूमि रही है । भगवान राम यहाँ पर रुके थे और सूर्य की उपासना की और इस स्थान पर सूर्य मन्दिर की स्थापना की आधार शिला रखी थी। देश के चार सूर्य मन्दिर उड़ीसा का कोणार्क, काशी के लोलार्क के समतुल्य ही मऊ जनपद के देवलास में स्थित सूर्य मन्दिर का हैं।

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कहते है श्रीमद् भगवत गीता के दशम अध्याय के तेरहवे श्लोक के अनुसार देवल श्रृषि द्वापरयुग के अन्तिम चरण में विगमान थे, उनकी उत्पति दक्ष प्रजापति की कन्या वृष्णा से हुयी थी। श्रीकृष्ण जी ब्रह्मविद योगी और सूर्य देव के अन्नय उपासक थे। देवल जी को सूर्य देव का बाल रुप ही पसंद आया इसलिए देवलास पर ही उन्होने बालार्क मन्दिर की स्थापना की। ऐसा माना जाता है कि इस मन्दिर को राजा विक्रमादित्य द्वारा बनवाया गया है। यहाँ से सूर्य की मूर्ति कलश तथा अन्य मूर्तिया खुदाई के दौरान प्राप्त हुई है। यहां पर सूर्य कुंड में सूर्य षष्ठी के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है जहाँ हजारों की तादात में श्रद्धालु आते हैं और दर्शन कर भगवान सूर्य को प्रसाद चढाकर अपनी मनोकामना को पूरी करने के लिए मन्नते मांगते हैं। सूर्य मन्दिर के पीछे राजा विक्रमादित्य का सिंहासन आज भी विघमान है जिस पर दुर्लभ कलाकृतिया उद्धृत है। जो इसकी पौराणिकता को दर्शता है। सिहासंन पर उकेरी गयी कलाकृतियां सम्राट चन्द्रगुप्त के शासन काल के दौरान की है जिसको कई इतिहास के जानकार बताते हैं। ये इस इलाके की भव्यवता को और बढाता है। इस स्थान का एक और महत्व है, सूर्य मन्दिर के आसपास सभी धर्मो और हिन्दू जातियो के अलग-अलग मन्दिर है।

सूर्य मन्दिर पर आने वाले श्रद्वालु बताते हैं कि यहाँ पर भगवान राम और उनके पिता के द्वारा इस स्थान पर सूर्य मन्दिर की आधार शिला राखी गयी थी। जहाँ पर यह मन्दिर स्थित है, कहते है कि यहाँ पर सूर्य की उपासना करने आने वाले सभी श्रद्वालुओ को सभी मन्नते पूरी होती है। हालांकि, इतने पौराणिक स्थल की उपेक्षा के विषय में बताते है कि सरकार अगर ध्यान देती है यह स्थल प्रयर्टक स्थल के रुप में विकसित हो सकता है।

सूर्य मन्दिर के विषय में श्रद्वालु बताते हैं कि यह स्थान महर्षि देवल श्रृषि की तपोभूमि रही है। यहां पर प्रत्येक वर्ष मेला लगता है जहाँ हजारो की संख्या में श्रद्वालु आते हैं और पुजा पाठ करते हैं जिससे सभी की मन्नत भगवान सूर्य पुरा करते हैं।

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