जानें क्यों होता है तुलसी-शालिग्राम का विवाह…

Tulsi shaligram marriage

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यानि आज ही के दिन शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो कई कार्तिक मास में इस दिन तुलसी का विवाह शालिग्राम जी से करता है उसके पिछले जन्मो के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसी भाव के साथ वृन्दावन में आज भी तमाम मंदिरों में धूमधाम के साथ तुलसी शालिग्राम विवाह समारोह आयोजित किये गये। इस अनूठे विवाह में देश विदेश से भक्त हजारों की संख्या में शामिल हुए।

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वृन्दावन की पावन पर धरती आये दिन कोई न कोई धार्मिक आयोजन होते ही रहते है।आज के दिन पूरे ब्रज मण्डल में भगवान विष्णु के ही सूक्ष्म रुप शालिग्राम और तुलसी के विवाह समारोह, बड़ी धूमधाम और आस्था के साथ सम्पन्न हुए। इस मौके पर वृन्दावन के राधा दामोदर मन्दिर और हित रासमंडल मंदिर में भक्तों द्वारा विवाह का खास आयोजन किया गया।

शालिग्राम और तुलसी महारानी के विवाह के बारे में धार्मिक पुराणों में कहा गया है कि विष्णु जी के साले जलंधर का आतंक जब विश्व में व्याप्त हो गया तो देवताओ ने विष्णु जी से प्रार्थना कि वो उसका संहार करें। दुष्ट जलंधर विष्णु भगवान का साला लगता था। जलंधर भी सागर का बेटा था और लक्ष्मी जी भी सागर कि पुत्री थी, इस कारण विष्णु जी उसे मारने में संकोच कर रहे थे। ऐसा देवताओ का मानना था, लेकिन सत्य यह था कि जो जलंधर की पत्नी बड़ी पतिव्रता नारी थी। जिसके कारण कोई भी व्यक्ति जलंधर का बाल भी बांका नहीं कर सकता था। जलंधर को मारने के लिए देवताओ ने विष्णु भगवान को एक युक्ति बतायी और कहा कि आप जालंधर की पत्नी वृंदा का शील भंग करे जिससे कि जलंधर को मारा जा सके।

देवताओ के आग्रह करने पर भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा का शील भंग किया उसी समय जलंधर वहां पहुँच गया। वृंदा ने अपने तेज से विष्णु भगवान को पहचान लिया और अपना शील भंग करने के कारण उनको श्राप दिया कि तुम काले पत्थर के बन जाओ तभी भगवान काले पत्थर के हो गये जिनको शालिग्राम कहा जाने लगा। श्राप देने के बाद वृंदा को बहुत दुःख हुआ तो इस पर भगवान विष्णु बोले कि, ‘हे वृंदा तुम संताप मत करो और में तुम्हे ये वचन देता हूँ कि आज के दिन जो भी व्यक्ति शालिग्राम और वृंदा यानि तुलसी की शादी कराएगा उसके पिछले सभी जन्मो के पाप धुल जाएँगे।’

तब से लेकर आज तक इस दिन श्रद्धालु तुलसी शालिग्राम का विवाह कर पुण्य कमा रहे हैं और वृन्दावन में तो इस उत्सव का आनन्द ही अलग है। विवाह कार्य सम्पन्न कराने वाले पंडित कृष्ण शास्त्री और वर व कन्या पक्ष की ओर से महंत लाडिलीदास महाराज और दामोदर चंद गोस्वामी ने इस अनौखे आयोजन की पूरी जानकारी दी।

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