Union Budget 2018: जेटली की पोटली से किसानों के लिए तोहफा

Union Budget 2018

आज केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली मोदी सरकार का पांचवा व आखिरी बजट संसद में पेश कर दिया है। इस बजट से आम आदमी को कई उम्मीदें तो है ही लेकिन किसानों को इस बजट से काफी उम्मीदें थी हुआ भी कुछ ऐसा ही जेटली ने किसानों के लिए बड़े तोहफे का ऐलान किया है। किसानों को उनकी लगत से डेढ़ गुना लाभ देने की बात कही है।

जेटली ने अपने भाषण में कहा कि, ‘हमारे दल के घोषणा पत्र में यह संकल्प है कि कृषि को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को उनकी लागत से कम से कम डेढ़ गुना लाभ मिले। हम इसके प्रति संवेदनशील हैं।’

और क्या है ख़ास किसानों के लिए ?

  • किसी उत्पाद की कीमत एमएसपी से कम होने पर यह जरूरी है कि सरकार
  • उनकी फसल को खरीदे। सरकार इसके लिए व्यवस्था करेगी।
  • हमारे 86 फीसदी से अधिक किसान लघु एवं सीमांत किसान हैं। उनके लिए ग्रामीण कृषि बाजारों का विकास किया जाएगा।
  • मुझे यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को 1.5 गुना किया गया है।
  • गांवों में 22 हजार हाटों को कृषि बाजार में तब्दील किया जाएगा।
  • बजट में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर होगा।
  • आलू-प्याज के लिए ऑपरेशन ग्रीन लॉन्च किया जाएगा।
  • 1200 करोड़ रुपये की राशि के साथ राष्ट्रीय बांस मिशन की शुरुआत की जाएगी
  • इस बजट में मछुआरों और पशुपालकों को भी किसानों की तर्ज पर दिए जाएंगे क्रेडिट कार्ड।
  • कृषि बाजार के विकास के लिए 2,000 करोड़ रुपये की राशि का आवंटन किया जाएगा।
  • कृषि क्रेडिट के लिए 11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन होगा।
  • खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के लिए आवंटन राशि को दोगुना किया गया।
  • कृषि उत्पादों के निर्यात को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य।
  • सरकार का पूरा फोकस गांवों पर ही रहेगा।
  • सरकार ईज ऑफ लिविंग पर जोर दे रही है। सरकार साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करेगी।
  • ऐसे पौधे जिनका दवाइयों में इस्तेमाल होता हो उनका भी सरकार उत्पादन बढ़ाने के लिए बढ़ावा देगी।
  • उन्होंने कहा कि 27.5 करोड़ टन अनाज का उत्पादन हुआ।
  • लगभग 300 मिलियन टन फलों और सब्जियों का रेकॉर्ड उत्पादन हुआ है।
  • ई-नैम को भी हमने किसानों को तहत जोड़ा है। ताकि किसानों को जहां ज्यादा मूल्य मिलती है।
  • किसान कृषि लोन की सुविधा से वंचित रह जाते हैं, ये बंटाईदार होते हैं, जिनको बाजार से कर्ज लेना पड़ता है। नीति आयोग ऐसी व्यवस्था बना रहा है कि ऐसे किसानों को कर्ज लेने में सुविधा मिले।

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