मालदीव में इमरजेंसी, पूर्व राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस गिरफ्तार

Maldives

 

माले। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव में सोमवार शाम आपातकाल की घोषणा की है। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के बीच विवाद बढ़ने के बाद ये घोषणा की गयी। दरअसल, राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने पार्टी से अलग हुए 12 सांसदों को बर्खास्त कर दिया था। जिसके बाद सांसदों ने विपक्ष का दामन थाम लिया था तो वहीं इनमें से कुछ नेताओं को कैद भी कर लिया गया। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने 9 राजनीतिक असंतुष्टों की रिहाई और 12 सांसदों की फिर से बहाली का आदेश दिया लेकिन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया और सोमवार की शाम मालदीव में आपातकाल की घोषणा कर दी। देश में गहराते राजनीतिक संकट के बीच यह कदम उठाया गया है और आपातकाल 15 दिनों के लिए लगाया गया है।

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भारत ने जताई चिंता

आपातकाल के बाद सेना को अतिरिक्त ताकत दी गई है साथ ही सेना को सर्च और गिरफ्तारी के आदेश भी दिए गए हैं। सेना ने छापेमारी और गिरफ्तारियां शुरू कर दी हैं। यहां तक कि जानकारी सेना ने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तोड़ दिए हैं। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को आज गिरफ्तार कर लिया गया। मालदीव के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अली हामीद, जुडिशियल एडमिनिस्ट्रेटर के एडमिनेस्ट्रेटर को भी गिरफ्तार कर पुलिस अपने साथ ले गई। वहीं, भारत ने मालदीव के हालातों पर चिंता जाहिर की है और लोगों को कहा है अगर जरुरी न हो तो वहां की यात्रा पर न जायें।

अमेरिका ने की अपील

मालदीव में आपातकाल पर अमेरिका ने कहा है कि इस आपात स्थिति में वह मालदीव के लोगों के साथ है। अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने मालदीव की सरकार और सेना को कानून का पालन करने, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र का सम्मान करने की अपील की है। गौर हो कि,अगर अब्दुल्ला यामीन कोर्ट का आदेश मानते हुए सांसदों को बहाल करते हैं तो उनकी सरकार अल्पमत में आ जाएगी और उन पर महाभियोग चलाया जा सकता है।

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