शव गृह में शव चूहों के कुतरने पर किया रोड जाम

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कितने लापरवाह हैं यह शवगृह में रखे शव को चूहों के खाने से साबित हो गया है। अफसरों की अमानवीयता के चलते जो परिवार पहले ही अपने प्रिय की मौत से आहत था उसके शव को चूहों के खाने से और ज्यादा धक्का लगा। विभागीय अफसर कह रहे हैं, जिस फ्रीजर में शव रखा गया वह टूटा था इस वजह से चूहे अंदर घुस गए। जिस तरह शव के चेहरे को चूहों ने खाया है उससे परिजनों का आक्रोश फूट गया। हालांकि बाद में अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में जांच बैठा कर परिजनों को ढाढ़स बंधाया है।

दरअसल बताया जा रहा है कि सेक्टर-15 निवासी ओमप्रकाश ने प्रॉपर्टी बेचने के बाद रुपये नहीं मिलने पर आत्महत्या कर ली थी। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए बुधवार रात को सामान्य अस्पताल में लाया गया था। शव को रखवाने के बाद परिजन वापस चले गए। वीरवार सुबह जब परिजन अस्पताल के शव विच्छेदन गृह में पहुंचे तो फ्रीजर में रखे शव को चेहरे के पास चूहे खा रहे थे। जिससे परिजनों का गुस्सा फुट पड़ा। उन्होंने वहां पर जमकर रोष जताया। उसके बाद पुलिस ने पहुंचकर उन्हें शांत किया और पोस्टमार्टम कराया। परिजनों ने लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने जांच शुरू करा दी है।

रात को व्यापारियों द्वारा सुसाइड करने के बाद शव को सिविल अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया था। यहां भी हालात यह हैं कि शव के चेहरे को चूहों ने कुतर दिया। इससे भी मृतक के परिजन रोष में भरे थे। सिविल लाइन थाना पुलिस ने मृतक व्यापारी ओमप्रकाश की पत्नी रितु की शिकायत पर नरेश व योगेश बजाज के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने का केस दर्ज कर लिया है। मृतक का एक बेटा व एक बेटी है।

सुसाइड नोट में हुआ खुलासा

परिजनों ने गुरुवार को एक नोट पुलिस को दिया। परिजनों ने कहा कि यह सुसाइड नोट मृतक ओमप्रकाश ने जान देने से पहले लिखा था। सुसाइड नोट में लिखा है मै ओमप्रकाश अपनी जान दे रहा हूं। मेरी मौत के जिम्मेदार नरेश नासा व बिजली निगम में कार्यरत एसडीओ योेगेश बजाज है। इन दोनों ने उसे धोखा दिया। इन दोनाें ने मेरे से मेरी प्रॉपर्टी नंदवानी नगर एक्सिस बैंक के पीछे खरीद ली और सौदा एक करोड़ 58 लाख रुपए में तय हुआ। आरोपियों ने बकाया पेमेंट 3 माह में देने की बात कही। इसके बाद आरोपियों ने जमीन की रजिस्ट्री अपनी-अपनी पत्नीयों के नाम करवा ली।

परंतु बकाया पेमेंट समय पर नहीं दी। आरोपी उसे बहकाते रहे। कभी कहते काम मंदा है तो कभी कहते कुछ दिन बाद दे देंगे। आरोपियों इसके बाद कहने लगे जब तेरी प्राॅपर्टी बेच देंगे तो पेमेंट कर देंगे। इस तरह से आरोपियों ने पेमेंट नहीं की। मृतक ओमप्रकाश ने नोट में लिखा है कि आरोपियों ने 96 लाख रुपए उसे देने थे। जबकि प्राॅपर्टी का सौदा एक करोड़ 58 लाख रुपए में तय हुआ था। इस तरह से आरोपियों ने बकाया पैसे नहीं दिए। आरोपी प्राॅपर्टी का सौदा तय होने के बाद उस प्राॅपर्टी की कीमत एक करोड़ 20 लाख रुपए बताने लगे। इसके साथ कहने लगे कि उसे उनके एक करोड़ 20 लाख रुपए देने हैं। रकम न मिलने से वह परेशान है।

आज देश मैं इतना ज्यादा भ्र्ष्टाचार बढ़ गया है की लोगो को अपनी जान देनी पड़ रही है। अगर आपके सामने ऐसी कोई घटना घटती है तो पीड़ित व्यक्ति की सहायता करे। और जुड़े रहिये हमारे साथ हम आपको ऐसे ही नयी नयी खबरे सबसे पहले देते रहेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*